वैज्ञानिक को माइक्रो आरनऐ रिसर्च में क्या हासिल हुआ -COVID 19

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तांन हमारा ,आखिर कुछ तो है यहाँ की व्यक्ति में जो दुनिया ने सदियों से सलाम किया है |

दोस्तों ये बात इस वक्त मैं इसलिए कर रहा हूँ, क्योकि जो कुछ इस वक्त दुनिया में हो रहा है उसमे भारत की जमीन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बतायी जा रही है |

और ये कोई हवा हवाई की बात नहीं है ,

ना ही किसी का धार्मिक प्रवचन ,यह बात वैज्ञानिक रिसर्च में सामने आयी है |

भारतीयों में अपनी अलग ताक़त है | इस वक्त दुनिया के साथ साथ भारत भी
कोरोना वायरस से दो दो हाथ करने में लगा हुआ है |

लेकिन इस महासमर में भारत के पास दुनिया से ज्यादा दो दो हाथ करने की ताकत है |

वैज्ञानिको का मानना है की भारतीयों में एक स्पेशल माइक्रो आरनऐ(RNA) मौजूद है, यह माइक्रो आरनऐ (MICRO RNA)बाकी देशो के लोगों में नहीं पाया जाता है|

इस माइक्रोऑर्गेनिस्म (MICRO ORGANISM) में कोरोना को नस्ट करने की क्षमता है |

बड़ी बात तो यह है की कोरोना भी आरनऐ(RNA) वायरस है |

किसने की माइक्रो आरनऐ की खोज यह चौकाने वाली बात है ??

अब इस चौकाने वाली इस रिसर्च ने पूरी दुनिया को हैरानी में डाल दिया है |


लिहाजा आपके मन में भी में यह सवाल उठ रहा होगा की यह खोज किसने की ? तो ये खोज
इंटरनेशनल सेंटर ऑफ़ जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी दिल्ली की टीम ने की है |


जिसमे भारत के वैज्ञानिक डॉक्टर दिनेश गुप्ता के नेतृत्व में 4 प्रमुख ने 50 देशो के कोरोना पेशेंट पर रिसर्च की यह रिपोर्ट रिसर्च ऑफ़ जनरल में भी छप चुकी है |

यानि ऑफिसियल है ,जो की संकट की घडी में भारतीयों के लिए किसी उम्मीद से कम नहीं है |

वैज्ञानिक को माइक्रो आरनऐ रिसर्च में क्या हासिल हुआ ??

मिक्रोबायोलॉजिस्ट शीतल वर्मा के मुताबिक वैज्ञानिको की टीम ने भारत ,चीन ,अमेरिका , इटली ,नेपाल, के लोगों पर रिसर्च किया

सब की जीन सिक्वेंसिंग(sequencing) की गयी इंटीग्रेटेड सिक्वेंसिंग(sequencing) जीनोम की पड़ताल में भारतीयों में माइक्रो आरनऐ यानि एचएसऐ एमआई आर 27 बी मिला ये लेकिन मजे की बात तो ये है |

की माइक्रो आरनऐ भारत के अलावा किसी और के देशो के लोगो में नहीं पाया गया |

भारतीयों में SARC को वायरस में एक नुट्रिशन भी देखा गया |

इस पर एक विशेष प्रकार का प्रोटीन पाया गया , शोध में पता चला की भारतीयों में मौजूद विशेष प्रकार का माइक्रो आरनऐ वायरस को म्युटेंट कर देता है|

जिससे वायरस क्षमता कम हो जाती है , ये क्षमता भारत के लोगो में दूसरे देशो की तुलना में ज्यादा हैं |

शोध में सिस्टेमेटिक लेवल एनालिसिस और बायोइन्फरमेटिक्स टूल का प्रयोग किया गया |

इससे शोध के नतीजे देखकर तमाम एक्सपर्ट की आँखे चार हो गयी है|


इस प्रयोग को बड़े पैमाने पर किया है रहा है ,और दुनिया के तमाम देशो से डाटा जुटाकर रिसर्च हो रहा है|

अब तक के आंकड़े WHO को शेयर किये जा रहे है|

यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर भी साबित हो सकता है |

क्या होते है आरनऐ और माइक्रो आरनऐ ?


किसी भी जीवित प्राणी के सरीर में डीएनए और आरनऐ होते है |
डीएनए की तरह आर न ऐ भी विभिन्न प्रकार की प्रोटीन बनाने का काम करता है |

भारत के प्रसिद्ध डॉक्टर का बड़ा बयान …

डॉक्टर दिनेश ने कहा की भारत के लोगो में एक खास क्षमता है , वायरस से लड़ने में जो कि बहुत काम की है |
उन्होंने अपनी बात को साबित भी किया है,
१) दरअसल पहली बार जब वुहान से सेकड़ो नागरिक को एयरलिफ्ट किया गया |

और यहाँ आया तब महामारी अपने चरम पर थी ,उसके बावजूद एक भी नागरिक कोरोना से पॉजिटिव नई निकला |

२)विदेश से जब 12 नागरिक राजस्थान घूमने आये थे ,

तो यहाँ पर कई जगह घूमे और 150 से ज्यादा लोगो के संपर्क में आये लेकिन ड्राइवर को

छोड़कर कोई भी संक्रमित नई पाया गया |

३) ईरान से भारत लाये गए नागरिको को जैसलमेर में रखा गया, लेकिन जाँच के बाद कोई भी कोरोना पॉजिटिव नई पाया गया |

४)कनिका कपूर से 50 से ज्यादा लोग संपर्क में आये लेकिन सभी कोरोना पॉजिटिव निकले है |

कहा जा सकता है ……

कि भारतीयों में रोग प्रतिरोधक क्षमता दूसरे देशो कि तुलना में ज्यादा है,

जो दर्शाता की यह देश में बड़ा असर नई कर पायेगा |

बढ़ते तापमान ने जगाई नयी उम्मीद

वैज्ञानिक शोध के अनुसार पता चला है , कि जिन देशो में तापमान ज्यादा रहा है , वहाँ कोरोना का असर ज्यादा नहीं रहा है|

और जिन देशो में तापमान नीचे रहा है , उन देशो में कोरोना का असर ज्यादा रहा है |

मौसम विभाग क अनुसार भारत में आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने की सम्भावना है ,

जो की भारत के लोगो क लिए के सुकून की बात होगी |

आने वाले अप्रैल क महीने में तापमान बढ़ने की आशंका जताई जा रही है,

जिससे लगता है कि कोरोना का भारत पर असर काम रहेगा|

भारत में संजीविनी की हो रही तलाश

भारत के केंद्रीय अनुशंधान संस्थान के वैज्ञानिको ने भी कोरोना से होने वाले रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन की दवा तैयार करने की बात कही है |

यह दवा मौजूदा भारतीयों में ही तलाश की जायेगी,

वैज्ञानिको का मानना है , कि अगर फेफड़ों में होने वाले न्युट्रोफिल एक्सटरसेल्लुलर क किसी तरह से रोक लिया जाये तो

संक्रमण होने वाली मौत पर काफी देर तक काबू पाया जा सकता है |

वैज्ञानिको के मुताबिक रक्त कणिकाओं में मौजूस न्युट्रोफिल जो तो शरीर में किसी भी इन्फेक्शन
के होने से बचाने में मददगार होता है |

कुछ परिस्थितियों में या हाइपरएक्टिविटी में शरीर के विरोध में काम करना शुरू कर देता हैं | इसी से ये फेफड़ो में जाल सा बना लेता है ,

जिससे मरीजों को सांस लेने में समस्या होती है |

और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा काम होने लगती है | जिससे मरीजों को बचाना मुश्किल हो जाता है |

वैज्ञानिको का इस दिशा में प्रयोग चल रहा है |

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